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अप्रैल, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रेडियो का लोगों को कला के साथ जोड़ने का प्रयास..

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 रेडियो सलाम नमस्ते 90.4 नें आर्ट मंथन के जरिये लोगो को कला से जोड़ने का प्रयास किया हैं।  भारत दुनिया भर में अपनी कला और सांस्‍कृति के लिए जाना जाता है। देंश के विभिन्न राज्यों की अपनी विशेष संस्कृति और पहचान हैं। मधुबनी, ढोकरा, कालीघाट कला, वारली. कला के सभी रूप भारतीय कला और संस्कृति की धरोहर थे, जिनका अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। इसलिए हमें इन कलाओं को जीवंत करने और समुदाय के साथ जोड़ने की जरूरत है। नोएडा सेक्टर-62 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्डीज (आईएमएस) के सामुदायिक रेडियो सलाम नमस्ते 90.4 ने कार्यक्रम " कला मंथन " की शुरुआत की थी। जो राजस्थान से भारतीय कला के विभिन्न रूपों की कहानियां लाता है, जैसे उत्तर पूर्वी भारत का पथचक्र, कालीघाट कला। बंगाल, बिहार से मिथिला कला, लघु कला, कलमकारी, गोंड कला और भारत के विभिन्न हिस्सों और जगहा से बहुत कुछ। आर्ट मंथन एक नियमित साप्ताहिक फीचर है जो हर शनिवार सलाम नमस्ते कम्युनिटी रेडियो पर दोपहर 12 बजे प्रसारित किया जाता है। आर्ट मंथन कारीगरों, कला छात्रों और कला के प्रति उत्साही लोगों को एक साथ लाता है, जो इस तरह क...

कॉलेज और स्कूल पार्टी के लिए साड़ी के अनोखे अंदाज...

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साड़ी भारत में काफी लोकप्रिय है। इसे एथनिक वियर में गिना जाता है। जब बात आती है भारतीय संस्कृति की तो साड़ी उसमे चार-चांद लगा देती है। इसी वज़ह से सिर्फ महिलाओं में ही नही बल्कि लड़कियों में भी साड़ी का बहुत क्रेज है। लड़कियां साड़ी को किसी त्योहार पर घर में किसी फंक्शन पर साथ ही स्कूल और कॉलेज की पार्टी में पहना ज्यादा पसंद करती हैं। सेलिब्रिटी भी इसे पहनना पसंद करते हैं। साड़ी में आजकल इंडो वेस्टर्न साड़ी भी आती है जो पार्टी में सुंदर लुक देती है। साड़ियां भी कई तरीके की होती हैं और कई तरह से पहनी जाती हैं जैसे की स्कूल और कॉलेज पार्टी में लड़कियां सिंपल सोबर साड़ी पहनती है। जैसे की सिंपल बॉर्डर वाली साड़ी और प्रिंटेड साड़ी चार्म लुक देती है। साड़ी कई तरह की होती है प्लेन साड़ियों, सिंथेटिक साड़ियों, प्रिंटेड साड़ियों और डिजाइनर साड़ियों की तरह नियमित पहनने वाली साड़ियाँ हैं। साथ ही साड़ी कई अलग-अलग तरीके से पहनी जाती हैं कई पारंपरिक तरीके से और कई स्टाइलिश तरीके से जिसे स्टनिंग लुक मिलता है।

‘छपाक’ टीम ने फिल्म का पहला शेड्यूल किया पूरा...

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दीपिका पादुकोण इस वक्तत अपनी अपकमिंग फिल्म छपाक की शूटिंग में बिजी हैं। मेघना गुलजार के निर्देशन में बन रही फिल्म छपाक एसिड अटैक पर अधारित है। दीपिका फिल्म में एसिड अटैक पीड़ित लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं। दीपिका पादुकोण ने छपाक की शूटिंग का आरंभ दिल्ली में 25 मार्च 2019 को किया था। हाल ही में टीम नें फिल्म का पहला शेड्यूल पूरा कर लिया हैं जिसकी जानकरी मेघा गुलजार ने अपने सोशल मीडिया पर तस्वीर को शेयर करते हुए दी साथ ही कैप्शन में लिखा happily halfway done! Delhi schedule wrap for team. छपाक फिल्म में दीपिका पादुकोण मालती का किरदार निभाती नज़र आएंगी। छपाक फिल्म एसिड अटैक पिड़ितो के लिए एक प्रेरणा हैं। मेघना गुलजार के निर्देश में बन रही यह फिल्म 10 जनवरी 2020 को रिलीज होगी।

गर्मियों में स्टाइलिश के साथ पहने आरामदायक कपड़े...

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मौसम के बदलनें के साथ ही हमारा स्टाईल भी बदलनें लगता हैं सर्दियों में गर्म कपड़े और गर्मियों में ठंड़े कपड़े जो अपके शरीर को गर्मी से बचाते है और ठंडक देते हैं। मौसम जैसा भी हो सभी स्टाइलिश कपड़े पहना पसंद करते हैं और सोबर जो आपकी सुंदरता को बरकरार रखें। गर्मियों में सभी लाइट वेट कपड़े पहना पसंद करते है। गर्मियों में कपड़े के मटेरियल के साथ ही उसके रंग पर भी ध्यान देना जरूरी होता हैं। गर्मियों में सफ़ेद लेमन, मूव लाइट पिंक, पीच, गाजरी आसमानी जैसे हलके रंग के कपड़े पहने जो आँखो को ठंडक पहुँचाते हैं। आजकल  कुर्ती का स्टाइल बहुत लोकप्रिय है। हम उन्हें कई तरह से पहन सकते है। प्रिंटेड सुट और प्रिंटेड कुर्ती जो की हम पलाज़ो के साथ पहन सकते हैं। जो आपको काफी अट्रैक्टिव दिखने में मदद करता है। जंपसूट जो की आपको स्टाइलिश दिखने में मदद करता है। जंपसूट आजकल ट्रेंड में है। जंपसूट अलग-अलग स्टाइल और पैटर्न में उपलब्ध हैं। जंपसूट को कॉलेज गोइंग गर्ल्स, वर्किंग वुमन सभी पहन सकती हैं। कॉटन का श्रग्स गर्मियों में पहना बहुत पसंद किया जाता है। क्योकि कॉटन जल्द पसीना सोख लेता हैं। यह बाजार में कई त...

फिल्म 'भारत' के पोस्टर रिलीज के साथ सलमान खान ने इस तरह किया दर्द बयां...

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पिछले कुछ समय से सलमान खान अपनी फिल्म ' भारत ' को लेकर काफी चर्चाओं में है। सलमान खान अपने सोशल मीडिया पर फिल्म भारत के अलग-अलग लुक को रिलीज कर रहे हैं। हालिमें सलमान खान नें भारत का पोस्टर रिलीज किया है। पोस्टर में सलमान खान की आखों में काफी दुख नज़र आ रहा है। साथ ही सलमान खान के साथ कैटरीना कैफ भी नज़र आ रही है। इसके साथ ही फिल्म में भारतीय बॉर्डर भी दिखाया गया है। सलमान खान पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा कि 'हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे दर्द छुपा होता है और वही दर्द आपको जिंदा रखता है'। अली अब्बास ज़फर के निर्देशन में बनी फिल्म भारत 5 जून को ईद के मौके पर रिलीज हो रही है। आपको बता दें कि फिल्म भारत का ट्रेलर 24 अप्रैल को रिलीज होना है। ट्रेलर रिलीज से पहले डेली फिल्म का एक पोस्टर रिलीज किया जा रहा है। फिल्म में सलमान खान और कटरीना कैफ साथ ही दिशा पटानी और सुनील ग्रोवर भी नजर आएंगे।

जलियांवाला बाग हत्याकांड : जनरल डायर ने क्यूं ली बेकसूर लोगों की जान !

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जलियांवाला बाग हत्याकांड को इस हफ्ते सौ साल पूरे होने जा रहे हैं। जिसमें अमृतसर के जलियांवाला बाग में जमा हुए निहत्थे लोगों को घेरकर चारों तरफ से गोलियां चलाई गई थी, इसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। साल 1919 में ब्रिटेश सरकार ने हमारे देश में कई तरह के कानून लागू किए थे जैसे ‘रॉलेक्ट’ इस अधिनियम के अनुसार भारत की ब्रिटिश सरकार किसी भी व्यक्ति को देशद्रोह के शक के आधार पर गिरफ्तार कर सकती थी और उस व्यक्ति को बिना किसी जूरी के सामने पेश के जेल में डाल सकती थी। इसके अलावा पुलिस दो साल तक बिना किसी भी, जांच के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में भी रख सकती था। रॉलेक्ट के तहत पंजाब के दो क्रांतिकारी नेता डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार कर लिया गया। यह दोनों नेता पंजाब में काफी लोकप्रिय थे। जिसके विरोध में अमृतसर के लोगो ने कई प्रदर्शन किए और कई रैलियां निकाली। अमृतसर के बिगड़ते हालातों पर काबू पाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने यह जिम्मेदारी डिप्टी कमेटीक मिल्स इरविंग से लेकर ब्रिगेडियर जनरल आर.इ.एट डायर को सौंप दी थी और डायर ने 11 अप्रैल को अमृतसर के हालातों को सही करने का काम...

लोकसभा चुनाव 2019 : क्या आठवी बार अपनी जीत कायम रख पाएंगे संतोष गंगवार !

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उत्तर-प्रदेश बरेली लोकसभा सीट जहां इस वक्त भाजपा का कब्जा हैं. बरेली लोकसभा सीट शुरू से ही चर्चीत रही हैं. बरेली उत्तर-प्रदेश का 8 वां और भारत का 50 वां सबसे बड़ा शहर हैं. यह शहर प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना 100 स्मार्ट शहरों में से एक है. बरेली जिले में सात भगवान शिव के मंदिर हैं , इसलिए जिले को नाथ नगरी भी कहा जाता हैं. बरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधनसभा क्षेत्र आते हैं जिनका नाम हैं मीरगंज , भोजीपुरा , नवाबगंज , बरेली और बरेली छावनी. 2017 के विधानसभा चुनाव में इन सभी 5 सीटों पर बीजेपी का ही कब्जा रहा था. बरेली लोकसभा सीट पर वैश्य , दलित और मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व रहा है. बरेली की जनसंख्या लगभग 4448359 हैं. साथ ही साक्षरता दर तकरीबन 58.49 प्रतिशत हैं.  1952, 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की. लेकिन 1962 और 1967 के चुनाव में यहां कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और भारतीय जनसंघ ने यहां जीत दर्ज की. हालांकि , उसके बाद हुए तीन चुनाव में से दो बार कांग्रेस चुनाव जीती. 1989 के चुनाव में यहां बीजेपी की ओर से संतोष गंगवार जीते , जिसक...

क्या फिर से लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद में खिल पाएगा कमल !

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 उत्तर-प्रदेश के गाजियाबाद लोकसभा सीट जहां पर इस वक्त भाजपा की सरकार हैं. गाजियाबाद को गेटवे ऑफ यूपी , यानि यूपी का दरवाजा भी कहा जाता है. गाजियाबाद लोकसभा संसदीय क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं जिसमें लोनी , मुरादनगर , साहिबाबाद , गाजियाबाद और धोलाना हैं. जिसमें से 4 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. धोलाना सीट पर बहुजन समाज पार्टी का कब्जा है.  वर्तमान में यहां के सांसद वी.के.सिंह हैं. गाजियाबाद की जनसंख्या लगभग 46,61,452 हैं. गाजियाबाद के पुरूषों साक्षरता दर 85 प्रतिशत हैं और महिलाओं 81.42 प्रतिशत हैं. गाजियाबाद लोकसभा सीट 2008 में अस्तित्व में आई थी. गाजियाबाद में पहली बार 2009 चुनाव हुए थे. जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल को हरा कर भारतीय जनता पार्टी के  राजनाथ सिंह गाजियाबाद से एमपी बनें थे. साल 2014 में यहां पर बीजेपी के जनरल विजय कुमार सिंह ने कांग्रेस के राज बब्बर को 5.67.260 वोटो के भारती अंतर से हराया. देश में बीजेपी की दूसरी सबसे बड़ी जीत हैं. वी.के सिंह को 7.58.482 मत प्राप्त हुए. दूसरे नबर पर राज बब्बर को 191.222 मत प्राप्त हु...

क्या फिर एक बार पीएम को चुनेगी वाराणसी की जनता ?

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देश की सबसे हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट वाराणसी यहां से सांसद देश के पीएम नेरंद्र दामोदर दास मोदी हैं। साल 2014 में अचानक से नरेंद्र मोदी ने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला लिया। 2014 में नरेंद्र मोदी यहां तीन लाख 71 हजार वोटों से जीते। मोक्षदायनी और शिवनगरी केवल आस्था का केंद्र ही नही हैं बल्की मंदिरो का यह शहर शिक्षा ओर बनारसी साड़ी के लिए पूरे विश्व में एक अलग पहचान रखता हैं। इसी का नतीजा हैं कि 80 घाटों से सजें इस शहर के दर्शन के लिए प्रय्टक भारी संख्या में यहां आते हैं। इसी कारण मोदी नें पीएम बने के बाद काशी को क्योटो बनाने कि बात कही थी. देश के सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी में तकरिबन 18 लाख 32 हजार मतदाता हैं। जिनमें से लगभग 82 प्रतिशत हिंदू और 16 फीसदी मुस्लिम हैं हिंदुओं में 12 फीसदी अनुसूचित जाति और एक बड़ा तबका पिछड़ी जाति से संबंध रखने वाले मतदाताओं का भी हैं। 2014 सें पहले यहां विकास के काम की गति धीमी थी. लेकिन केंद्र में सरकार बने के बाद अबतक बनारस के लिए तकरिबन 315 बड़ी योजनाएं स्वीकार हो चुकी हैं। जिनमें से अबतक लगभग 279 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। विकास के ...

2019 लोकसभा चुनाव : क्या भाजपा मेरठ पर अपनी जीत कायम रख पाएगी !

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उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर मेरठ राजधानी दिल्ली से करीब 70-72 किलोमीटर की दूरी पर है. मेरठ की जनसंख्या लगभाग 13.1 लाख है. पिछले कुछ दशकों से यहां भारतीय जनता पार्टी का राज रहा हैं. मेरठ भरतीय जनता पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. साल 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने बुलंदशहर से लोकसभा चुनाव अभियान की शुरूआत की थी. वही मोदी सरकार का एक साल पूरा होने पर सहारनपुर में जश्न मनाया गया था. अगर वही हम मेरठ की तरक्की की बात करे तो मेरठ में अभी तक कुछ खास तरक्की नहीं हुई हैं. लोगो को अब भी उन्हीं मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हैं जिनका सामना वो पिछले कई समय से करते आ रहे हैं. उनकी समस्याओं का अभी तक कोई समाधान नही हुआ हैं , जैसे की रोहता रोड का 2014 में निर्माण शुरू हुआ था जब समाजवाजी सरकार थी लेकिन काम अभी तक पूरा नही हुआ हैं. रोहता रोड पर अभी तक 5 मृत्यू हो चुकी हैं और कम से कम 7 बार टेंपू पल्ट चुके हैं. गोरतलब करनें वाली बात हैं कि मेरठ में आवास विकास परिशद , मेरठ विकास प्रधिकरण , नगर निगम और उत्तर प्रदेश निर्माण जैसे मेहत्वपूर्ण विभाग हैं. जो शहर का विकास करते...

2019 लोकसभा चुनाव : क्या गांधी परिवार अमेठी में अपनी जीत कायम रख पाएगा ?

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उत्तर-प्रदेश के राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र अमेठी जहां के सांसद कांग्रेस उपअध्यक्ष राहुल गांधी हैं. अमेठी शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ रहा हैं. अगर विकास की बात करें तो कांग्रेस पार्टी के इस गढ़ अमेठी में राजीव गांधी के समय बहुत विकास हुआ सड़के बनी , फैक्ट्रियां लगीं और लोगो को रोजगार मिला लेकिन अब मानो यहां का विकास रूक सा गया हैं. आज भी अमेठी की जनता इंतजार में है कि यहां कब विकास होगा और बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. कांग्रेस के इतने साल राज करने के बाद भी अबी तक यहां कुछ खास विकास नहीं हो पाया. अमेठी के राजनीतिक इतिहास में शूरू से ही कांग्रेस का राज रहा हैं. लेकिन 1998 में यहां पहली बार भाजपा की सरकार बनी. भाजपा के संजय सिंह 205025 मत मिले वही कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को 181755 मत मिले. भाजपा से चुनाव जीतने वाले संजय सिंह भी आज कांग्रेस पार्टी के ही प्रमुख नेता हैं. 1999 में यहां फिर से एकबार कांग्रेस पार्टी ने अपना कबजा जमा लिया. साल 2014 में राहुल गांधी ने यहां स्मृति ईरानी को 1.07 लाख वोटों के अंतर से हराया था. राहुल की यह जीत 2009 के मुकाबले बेहद छो...

गोरखपुर में क्या फिर से खिलेगा कमल ?

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  उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. उत्तर-प्रदेश के पुरवानचल में बसा यह क्षेत्र गोरखनाथ मंदिर की वजह से दुनिया भर में मशहूर हैं. यहां समाजवादी पार्टी के प्रविन निशाद सांसद हैं. उन्होनें 2018 में हुए यहां के उप-चुनाव में जीत हासिल करी हैं. ये वो क्षेत्र है जिसमें संत कबीर , मुंशी प्रेमचंद , फिराक गोरखपुरी जैसे विश्व प्रसिद्ध लोग हुए. जिनके जरिए भारत को एक अलग पहचान मिली. गोरखपुर इस लोकसभा सीट में उत्तर-प्रदेश विधान सभा की 5 सीटे आती हैं. जिनके नाम है गोरखपुर ग्रामीण , गोरखपुर नगरीय , सहजनवा , कैम्पियरगंज और पिपराईच. गोरखपुर संसदीय सीट पर लगभग 19.5 लाख मतदाता हैं. इस सीट पर सबसे ज्यादा निषाद समुदाय के वोटर हैं. गोरखपुर सीट पर करीब 3.5 लाख वोट निषाद जाति के लोगों का है. उसके बाद यादव और दलित मतदाताओं की संख्या है. दो लाख के करीब ब्राह्मण मतदाता हैं. इसके अलावा करीब 13 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. गोरखपुर के राजनीतिक इतिहास की बात करे तो गोरखपुर में पहली बार चुनाव 1952 में हुआ जिसमें कांग्रेस के सिंहासन ने जीत हासिल की. वो 1992 तक लगातार यहां से सांसद ...

लोकसभा चुनाव 2019: इस बार भी लखनऊ में अपना परचम लहरा पाएगी बीजेपी !

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उत्तर प्रदेश की राजधानी कहे जाने वाले लखनऊ शहर अपनी खास नजाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी , दशहरी आम के बागों और चिकन की कढ़ाई के काम के लिए मशहूर हैं. गोमती के किनारे बसे लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है. माना जाता है कि इसे भगवान राम ने छोटे भाई लक्ष्मण के लिए बसाया था और कुछ लोग इसे लखन पासी के शहर के तौर पर भी जानते हैं. देश की हाई प्रोफाइल सीट में लखनऊ का भी नाम आता हैं. वर्तमान में इसके लोकसभा के सांसद राज्नाथ सिंह हैं. लखनऊ में कुल 9 विधानसभा की सीटें हैं जिनके नाम हैं लखनऊ कैंट , लखनऊ पश्चिम , लखनऊ उत्तरी , लखनऊ पूर्व , बक्शी का तालाब , मलिहाबाद , सरोजनी नगर और मोहनलालगंज. यहां की अबादी लगभग 45.89 लाख है और औसत साक्षरता दर 77.29% है 77 प्रतिशत आबादी हिंदू और 21 प्रतिशत आबादी मुस्लिम की है. साल 2014 के चुनाव में यहां 1949596 वोटरों ने हिस्सा लिया था वोट देने वालों में 53 प्रतिशत पुरूष और 46 प्रतिशत महिलाएं थी. बीजेपी की तरफ से पहले प्रधानमंत्री बनें अटल बिहारी वाजपेयी यहां के चार बार सांसद रह चुके हैं. यहां आजादी के बाद कुल 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें 6 ब...

क्या इस लोकसभा चुनाव में गौतमबुद्ध नगर में फिर एक बार खिल पाएगा कमल का फूल !

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  देश की राजधानी दिल्ली से सटा गौतमबुद्ध नगर जो की औद्रयोगिक कारखाने , टेक्निकल , इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की नौकरी के लिए देशभर में जाना जाता हैं. इसे नोएड़ा के नाम से भी पुकारा जाता है. गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट सूबे की वीआईपी सीटों में से एक है. यहां पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. यहां से सांसद महेश शर्मा केंद्र सरकार में मंत्री हैं. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्मंत्री मायावती के समय यहां का काफी विस्तार हुआ. 2015 में हुए दादरी कांड के दौरान यह क्षेत्र काफी सुर्खियो में रहा था. गौतम बुद्ध नगर निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत 5 सीटे आती हैं. जिनके नाम हैं नोएडा , दादरी , जेवर , सिंकदराबाद और खुर्जा , जिसमें खुर्जी अनुसूसित जाति के लिए आराक्षित है. गौतमबुद्ध नगर बनने से पहले ये बुलंदशहर परिसीमन के तहत आता था. ये सीट 2008 में अस्तित्व में आई. 2009 में पहली बार यहां पर चुनाव हुए थे. जिसमें बहुजन समाज पार्टी के सुरेन्द्र सिंह ने 2 लाख वोटो के अंतर से महेश शर्मा को मात दी और यहां के पहले सांसद बने. वो 2009 से 2014 तक नागर कृषि समिति के सदस्य भी रह चुके हैं , लेकिन 2014 में चली मोदी ...