रेडियो का लोगों को कला के साथ जोड़ने का प्रयास..
रेडियो सलाम नमस्ते 90.4 नें आर्ट मंथन के जरिये लोगो को कला से जोड़ने का प्रयास किया हैं।
भारत दुनिया भर में अपनी कला और सांस्कृति के लिए जाना जाता है। देंश के विभिन्न राज्यों की अपनी विशेष संस्कृति और पहचान हैं। मधुबनी, ढोकरा, कालीघाट कला, वारली. कला के सभी रूप भारतीय कला और संस्कृति की धरोहर थे, जिनका अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। इसलिए हमें इन कलाओं को जीवंत करने और समुदाय के साथ जोड़ने की जरूरत है। नोएडा सेक्टर-62 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्डीज (आईएमएस) के सामुदायिक रेडियो सलाम नमस्ते 90.4 ने कार्यक्रम "कला मंथन" की शुरुआत की थी। जो राजस्थान से भारतीय कला के विभिन्न रूपों की कहानियां लाता है, जैसे उत्तर पूर्वी भारत का पथचक्र, कालीघाट कला। बंगाल, बिहार से मिथिला कला, लघु कला, कलमकारी, गोंड कला और भारत के विभिन्न हिस्सों और जगहा से बहुत कुछ। आर्ट मंथन एक नियमित साप्ताहिक फीचर है जो हर शनिवार सलाम नमस्ते कम्युनिटी रेडियो पर दोपहर 12 बजे प्रसारित किया जाता है।
आर्ट मंथन कारीगरों, कला छात्रों और कला के प्रति उत्साही लोगों को एक साथ लाता है, जो इस तरह के कला के विभिन्न रूपों को जानते हैं और दिलचस्प कहानी के माध्यम से इन कला रूपों के सत्र वे उन कलाओं का वर्णन करते हैं। कला मंथन कला के क्षेत्र में अपनी यात्रा लाता है और उसी के बारे में जागरूकता पैदा करने वाले समुदाय के साथ जोड़ता है। कार्यशालाएं और सत्र अक्सर आयोजित किए जाते हैं, जिसमें कला के बारे जाने की और सीखने की कोई आयु सिमा नही हैं। उन्हें कला सीखने का अवसर मिलता है और कारीगर के साथ बातचीत करने का मौका भी मिलता है। महिलाओं और गांवों से बच्चों को भी यह हुनर सिखने का मौका मिलता है जो उनके लिए आजीविक कमाने का माध्यम बनता है। कला को बढ़ावा देने के लिए फ़्लेक मार्केट आदि भी एक माध्यम के रूप में जुड़ती हैं। कला मंथन समूह के कारीगर सामुदायिक को क्षेत्रों जैसे दीवारों, सड़क के किनारों आदि को चित्रित करने पर कला लाते हैं।
मंगलवार को सेक्टर 62 स्थित संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आर्ट क्रिएशन की फाउंडर आलफी ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान रेडियो साक्षात्कार के साथ साथ संसाधनहीन बच्चों के आर्ट की बारीकियों से अवगत कराया गया। आलफी ने बताया की भारत कला व संस्कृति का देश है, विविधता में एकता हमारी पहचान रही है। वर्तमान में विलुप्त होती भारतीय कलाओं को नई पहचान दिलाने की जरूरत है। हम काफी समय से लोगो को कला के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इन्ही विलुप्त कलाओं को जनमाध्यम के साथ जुड़कर घर-घर में पहुचाना आर्ट मंथन का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयास से मधुबनी व वरली आर्ट धीरे-धीरे लोगों तक पहुंच रही हैं, इसके अलावा उड़िसा का पठचित्र, गुजरात का पिथोरा, राजस्थान का फर, बंगाल का कालीघाट, मध्यप्रदेश का भील एवं गोंड जैसे कुछ ऐसे आर्ट हैं जिन्हें हमें सामाजिक प्रयास से आमलोगों तक पहुँचाने की जरूरत है।
भारत दुनिया भर में अपनी कला और सांस्कृति के लिए जाना जाता है। देंश के विभिन्न राज्यों की अपनी विशेष संस्कृति और पहचान हैं। मधुबनी, ढोकरा, कालीघाट कला, वारली. कला के सभी रूप भारतीय कला और संस्कृति की धरोहर थे, जिनका अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। इसलिए हमें इन कलाओं को जीवंत करने और समुदाय के साथ जोड़ने की जरूरत है। नोएडा सेक्टर-62 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्डीज (आईएमएस) के सामुदायिक रेडियो सलाम नमस्ते 90.4 ने कार्यक्रम "कला मंथन" की शुरुआत की थी। जो राजस्थान से भारतीय कला के विभिन्न रूपों की कहानियां लाता है, जैसे उत्तर पूर्वी भारत का पथचक्र, कालीघाट कला। बंगाल, बिहार से मिथिला कला, लघु कला, कलमकारी, गोंड कला और भारत के विभिन्न हिस्सों और जगहा से बहुत कुछ। आर्ट मंथन एक नियमित साप्ताहिक फीचर है जो हर शनिवार सलाम नमस्ते कम्युनिटी रेडियो पर दोपहर 12 बजे प्रसारित किया जाता है।
आर्ट मंथन कारीगरों, कला छात्रों और कला के प्रति उत्साही लोगों को एक साथ लाता है, जो इस तरह के कला के विभिन्न रूपों को जानते हैं और दिलचस्प कहानी के माध्यम से इन कला रूपों के सत्र वे उन कलाओं का वर्णन करते हैं। कला मंथन कला के क्षेत्र में अपनी यात्रा लाता है और उसी के बारे में जागरूकता पैदा करने वाले समुदाय के साथ जोड़ता है। कार्यशालाएं और सत्र अक्सर आयोजित किए जाते हैं, जिसमें कला के बारे जाने की और सीखने की कोई आयु सिमा नही हैं। उन्हें कला सीखने का अवसर मिलता है और कारीगर के साथ बातचीत करने का मौका भी मिलता है। महिलाओं और गांवों से बच्चों को भी यह हुनर सिखने का मौका मिलता है जो उनके लिए आजीविक कमाने का माध्यम बनता है। कला को बढ़ावा देने के लिए फ़्लेक मार्केट आदि भी एक माध्यम के रूप में जुड़ती हैं। कला मंथन समूह के कारीगर सामुदायिक को क्षेत्रों जैसे दीवारों, सड़क के किनारों आदि को चित्रित करने पर कला लाते हैं।





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