सॉफ्ट ड्रिंक में मौजूद ये चीज बढ़ा सकती हैं कैंसर का खतरा
पिछले महीने WHO ने आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने पर चेतावनी जारी की थी। वहीं अब आर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। WHO की कैंसर रिसर्च विंग इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर IARC इस जुलाई में मनुष्यों के लिए कैंसरकारी के रुप में एस्पार्टेम को लिस्ट कर सकती है। अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इस प्रोडक्ट का कितना इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। ये फैसला खाद्य उद्योग और नियामक के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
खाने-पीने से जुड़ी चीजें बनाने वाली कई कंपनियां चीनी की जगह कई तरह के आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करती हैं जिसमें सबसे आमतौर पर एस्पार्टेम को चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल तमाम कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, च्युइंग गम जैसी चीजों में किया जाता है। बता दे कि एस्पार्टेम में कोई कैलोरी नही होती है और यह साधारण चीनी की तुलना में 200 गुणा मीठा होता है। सॉफ्ट ड्रिंक में लगभग 95 फीसदी एस्पोर्टेम का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा वैसी चाय जो पीने के लिए तैयार होती है उसमें इसका 90 फीसदी इस्तेमाल होता है।
IARC ने पहले भी रात भर काम करने और रेड मीट खाने से कैंसर होने की संभावना जताई थी। इन्हें कैंसरकारी बताने को लेकर ये पहले भी आलोचना झेल चुका है। टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय स्वीटनर एसोसिएशन (ISA) ने कहा है कि उस तरह की समीक्षा से ग्राहक गुमराह हो सकते हैं और इसके लिए वह चिंतित हैं। ISA के महासचिव फ्रांसिस हंट-वुड का कहना है कि IARC एक फूड सेफ्टी निकाय नहीं हैं। उनका एस्पोर्टम की समीक्षा वैज्ञानिक रुप से सही नहीं है और व्यापक रुप से बदनाम शोध पर आधारित है।

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