2019 लोकसभा चुनाव : क्या गांधी परिवार अमेठी में अपनी जीत कायम रख पाएगा ?
उत्तर-प्रदेश के राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र अमेठी जहां के सांसद कांग्रेस उपअध्यक्ष राहुल गांधी हैं. अमेठी शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ रहा हैं. अगर विकास की बात करें तो कांग्रेस पार्टी के इस गढ़ अमेठी में राजीव गांधी के समय बहुत विकास हुआ सड़के बनी, फैक्ट्रियां लगीं और लोगो को रोजगार मिला लेकिन अब मानो यहां का विकास रूक सा गया हैं. आज भी अमेठी की जनता इंतजार में है कि यहां कब विकास होगा और बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. कांग्रेस के इतने साल राज करने के बाद भी अबी तक यहां कुछ खास विकास नहीं हो पाया.
अमेठी के राजनीतिक इतिहास में शूरू से ही कांग्रेस का राज रहा हैं. लेकिन 1998 में यहां पहली बार भाजपा की सरकार बनी. भाजपा के संजय सिंह 205025 मत मिले वही कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को 181755 मत मिले. भाजपा से चुनाव जीतने वाले संजय सिंह भी आज कांग्रेस पार्टी के ही प्रमुख नेता हैं. 1999 में यहां फिर से एकबार कांग्रेस पार्टी ने अपना कबजा जमा लिया. साल 2014 में राहुल गांधी ने यहां स्मृति ईरानी को 1.07 लाख वोटों के अंतर से हराया था. राहुल की यह जीत 2009 के मुकाबले बेहद छोटी थी. 2009में राहुल 3.70 लाख वोटों के अंतर से जीते थे. जहां तक 2017 के विधान सभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस पार्टी यहां की चार में से एक सीट भी नहीं जीत पाई थी.
2019 के चुनाव में यहां फिर एकबार कांग्रेस उपअध्यक्ष राहुल गांधी को टक्कर देने के लिए भाजपा से स्मृति ईरानी खड़ी हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा की अमेठी की जनता किसको अपना प्रतिनिधित्व चुनती हैं. क्या एक बार फिर से जनता राहुल गांधी को अपना प्रतिनिधित्व चुनती है या फिर यह मौका इसबार स्मृति ईरानी को मिलता हैं.

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