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कॉन्टैक्ट लेंस लगाते समय इन बातों का ध्यान रखें!

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आज की तारीख में आंखों की रोशनी कमज़ोर होने पर कई लोग चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस का ऑप्शन चुनते हैं,  तो वहीं कुछ लोग फैशन के तौर पर भी कॉन्ट्रैक्ट लेंस लगाते हैं। लेकिन कई लोग ये नहीं जानते की कॉन्टैक्ट लेंस लगाने के बाद आंखों की केयर कैसे करनी है और किन बातों का ध्यान रखना है।  कुछ समय पहले अमेरिका के फ्लोरिडा का एक मामला सामने आया था। जिसमें एक शख्‍स कॉन्टैक्ट लेंस निकाले बिना ही सो गया जिसकी वजह से उसकी एक आंख की रौशनी चली गई थी। उसकी इस छोटी सी भूल ने उसे एक आंख से अंधा कर दिया। इसलिए अगर कोई भी चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करता है। तो उस व्यक्ति को कई एहतिहात बरतने  की बेहद ज़्यादा ज़रुरत है।  कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल कर रहे है तो आपको भी इन बातों का ज़रुर ध्यान रखें- • सबसे पहले तो जैसा आपने सुना की  कॉन्टैक्ट लेंस  को निकाले बिना सोने से माइक की आंखों के साथ क्या हुआ। इसलिए अगर आप भी  कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल  करते हैं तो गलती से भी  कॉन्टैक्ट लेंस को लगाकर ना सोएं। क्योंकि इससे आंखों में गंभीर इंफ...

सॉफ्ट ड्रिंक में मौजूद ये चीज बढ़ा सकती हैं कैंसर का खतरा

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पिछले महीने WHO ने आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करने पर चेतावनी जारी की थी। वहीं अब आर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। WHO की कैंसर रिसर्च विंग इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर  IARC  इस जुलाई में मनुष्यों के लिए कैंसरकारी के रुप में एस्पार्टेम को लिस्ट कर सकती है। अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इस प्रोडक्ट का कितना इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। ये फैसला खाद्य उद्योग और नियामक के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। खाने-पीने से जुड़ी चीजें बनाने वाली कई कंपनियां चीनी की जगह कई तरह के आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करती हैं जिसमें सबसे आमतौर पर एस्पार्टेम को चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल तमाम कोल्ड ड्रिंक्स , एनर्जी ड्रिंक्स , च्युइंग गम जैसी चीजों में किया जाता है। बता दे कि एस्पार्टेम में कोई कैलोरी नही होती है और यह साधारण चीनी की तुलना में 200 गुणा मीठा होता है। सॉफ्ट ड्रिंक में लगभग 95 फीसदी एस्पोर्टेम का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा वैसी चाय जो पीने के लिए तैयार होती है उसमें इसका 90 फीसदी इस्ते...

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जानिए योग दिवस का इतिहास और योग के अनेको फायदे

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योग भारतीय संस्कृति से जुड़ा है। अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए युगों युगों से हमारे देश में योग करने की परंपरा चली आ रही हैं। लेकिन आज के समय की अगर बात करें तो आजकल बहुत कम लोग योग करते है। लेकिन आज भी स्वस्थ रहने के लिए योग करना बहुत ज़रूरी है। रोज़ाना योग करने से व्यक्ति को हेल्दी और फीट रहने में मदद मिलती है। योग हमारे शारीरिक स्वास्थ्य, वज़न, सौंदर्य, एकाग्रता में सुधार लाने और मेंटल हेल्थ हो बेहतर रखने में मदद करती है। योग के कई आसन हैं हर एक आसान हमारे शरीर के लिए किसी ना किसी तरह से फायदेमंद होता है।  हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस साल योद दिवस की थीम “वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग” है। यह थीम “एक “पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के रुप में भी प्रतिनिधित्व करता है।  21 जून को क्यों मनाया जाता है योग दिवस? दरअसल 21 जून उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन होता है। इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति कहते हैं। ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन होता है। दक्षिणायन होने पर सूर्य का तेज़ कम हो जाता है। सूर्य दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियों को प्राप...

6 महिने के बच्चे की सफल मेटल-फ्री स्पाइन फिक्सेशन सर्जरी

6 महीने के एक बच्चे को एम्स में उसकी मां के बोन ग्राप्ट का इस्तेमाल कर मेंटल-फ्री स्पाइन फिक्सेशनसर्जी की गई है। एम्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों में मां द्वारा दी गई हड्डी से बच्च के गर्दन की रीढ़ की हड्डी को जोड़ा। एम्स के डॉक्टरों के यह सर्जरी पिछले वर्ष 10 जून को की थी। एम्स के डॉक्टरों का दावा है कि देश में इतने कम उम्र के बच्चे के गर्दन की रीढ की टूटी हुई हड्डी को बगैर किसी मेटल के इंप्लांट को जोड़ने का पहला मामला है। AIIMS के न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि जन्म के समय बच्चे का वज़न 4.5 किलोग्राम था। वज़न ज़्यादा होने की वजह से डिलीवरी   के दौरान बच्चे को खिंचने के कारण गर्दन की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। साथ ही ब्रकीयल प्लेक्सस (कंधे के नर्वस) में इंजरी हो गई थी। ब्रकीयत प्लेक्सस रीड़ की हड्डी से संवेदी संकेतों को हाथों में भेजता है। इससे हाथों में मूवमेंट होती है। जब बच्चे को एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया तब उसके हाथ में कोई हलचल नहीं हो पा रही थी। दायां हाथ और दोनों पैरों में भी खास मूवमेंट नहीं थी। इतनी कम उम्र के बच्चे की हड्डियां विकसित नहीं होती।...

अस्पताल में डॉक्टर ने बच्चे के घाव पर सामान चिपकाने वाली गोंद लगाई

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जोगुलाम्बा गडवाल जिला के ईजा नगरपालिका के रेनबो अस्पताल में एक एमबीबीएस डॉक्टर ने 7 साल के एक बच्चे के घाव पर एक चिपकाने वाला गोंद फेवीक्विक लगा दी। पीड़ित बच्चे के पिता वामसी कृष्णा के मुताबिक, वह और उनकी पत्नी सुनिता, जो कर्नाटक के रायचुर जिले के मूल निवासी हैं, अपने बेटे के साथ शुक्रवार को अपने रिश्तेदार की शादि में शामिल होने के लिए ईजा आए थे। 7 साल का बच्चा जिसका नाम प्रवीण चौधरी है, शादी के कार्यक्रम के दौरान और बच्चों के साथ खेलते खेलते गलती से गिर गया और उसकी बायीं आँख के पास चोट लग गई। बच्चे के पिता तुरंत लड़के को ईजा नगरपालिका के रेनबो अस्पताल लेकर गए, जहां एमबीबीएस डॉक्टर नागार्जुन ने बच्चे के घाव पर फेवीक्विक लगा दी जिसके बाद बच्चा दर्द से कराह उठा। इसके बाद इलाज के लिए बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया की बच्चे के घाव पर डॉक्टर ने फेवीक्विक लगा दिया था। इस घटना के बाद बच्चे के माता पिता ने शुक्रवार को रेनबो अस्पताल में इलाज कराने वाले डॉक्टर के खिलाफ आइजा थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

क्यों मनाया जाता है विश्व अस्थमा दिवस और कब हुई थी शुरूआत?

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दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण और बदलतें लाइफस्टाइल की वजह से अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में अस्थमा के मरीज़ करीब 3 करोड़ हैं। तो ऐसे में लोगों को अस्थमा के बारे में पूरी जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है। इसलिए लोगों में अस्थमा के बचाव और रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए, हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इस साल ‘विश्व अस्थमा दिवस’ 2 मई को मनाया जा रहा है। अस्थमा को दमा के नाम से भी जाना जाता है।   विश्व अस्थमा दिवस पहली बार कब मनाया गया था?  इस दिन को मनाने की शुरूआत 1993 में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी की WHO के सहयोग से ग्लोबल इनिशिएचिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा की गई थी। यह दिवस पहली बार 1998 में 35 से अधिक देशों में मनाया गया था। विश्व अस्थमा दिवस 2023 की थीम क्या है? विश्स अस्थमा दिवस को हर साल थीम के साथ मनाया जाता है और इस साल 2023 में इसकी थीम “अस्थमा केयर फॉर ऑल” रखी गई है।  अस्थमा क्या है और क्यों होता है ? अस्थमा फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा सांस की नली में सूजन हो...

12वीं में मार्स्क कम आने की वजह से शख्स को नहीं मिला रेंट पर मकान

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हम सभी के परिवार वाले उन्हें पढ़ने कि लिए कहते रहते हैं। कहतें है कि अच्छे मार्क्स आएंगे तो आपको अच्छी नौकरी मिलेगी और आपका भविष्य बेहरत होगा। लेकिन आजतक किसी ने ये तो नहीं कहा कि मकान रेंट पर लेने के लिए भी अच्छे मास्क का होना ज़रूरी है। आपको मेरी ये बात काफी अजीब लग रही होगी। लेकिन ऐसा एक मामला बेंगलुरु से सामने आया है। बेंगलुरु में एक लड़के के मार्स्क अच्छे नहीं आने के कारण मकान रेंट पर देने से मना कर दिया गया।  दरअसल, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी तेज़ी से वायरल हो रही है। जिसमें शख्स का कहना है कि मकान मालिक ने अच्छे मार्स्क ना आने की वजह से उसे रेंट पर मकान देने से मना कर दिया। इस पोस्ट में दो व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट हैं। यह ट्वीट यूज़र शुभ ने 27 अप्रैल को पोस्ट किया था। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा कि, "अंक आपका भविष्य तय नहीं करते हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से तय करते हैं कि आपको बंगलौर में फ्लैट मिलेगा या नहीं।" ये ब्रोकर और कमरे की खोज कर रहें शख्स के बीच की है। ब्रोकर का नाम ब्रिजेश है जो किराएं पर मकान खोज रहें योगेश से कहता है कि इतनी रात में आपको परेशान करने ...