6 महिने के बच्चे की सफल मेटल-फ्री स्पाइन फिक्सेशन सर्जरी

6 महीने के एक बच्चे को एम्स में उसकी मां के बोन ग्राप्ट का इस्तेमाल कर मेंटल-फ्री स्पाइन फिक्सेशनसर्जी की गई है। एम्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों में मां द्वारा दी गई हड्डी से बच्च के गर्दन की रीढ़ की हड्डी को जोड़ा। एम्स के डॉक्टरों के यह सर्जरी पिछले वर्ष 10 जून को की थी। एम्स के डॉक्टरों का दावा है कि देश में इतने कम उम्र के बच्चे के गर्दन की रीढ की टूटी हुई हड्डी को बगैर किसी मेटल के इंप्लांट को जोड़ने का पहला मामला है।

AIIMS के न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि जन्म के समय बच्चे का वज़न 4.5 किलोग्राम था। वज़न ज़्यादा होने की वजह से डिलीवरी  के दौरान बच्चे को खिंचने के कारण गर्दन की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। साथ ही ब्रकीयल प्लेक्सस (कंधे के नर्वस) में इंजरी हो गई थी। ब्रकीयत प्लेक्सस रीड़ की हड्डी से संवेदी संकेतों को हाथों में भेजता है। इससे हाथों में मूवमेंट होती है। जब बच्चे को एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया तब उसके हाथ में कोई हलचल नहीं हो पा रही थी। दायां हाथ और दोनों पैरों में भी खास मूवमेंट नहीं थी। इतनी कम उम्र के बच्चे की हड्डियां विकसित नहीं होती।

इस कारण रीड़ की हड्डी में metallic implants लगाकर जोड़ना संभव नहीं था। इसलिए बच्चे की मां ने अपनी कूल्हे के सबसे ऊपरी हिस्से की हड्डी (iliac crest bone) का पांच सेंटीमीटर हिस्सा दिया। सर्जरी के लिए एक साथ दो ऑपरेशन थियेटर इस्तेमाल किए गए। एक ऑपरेशन में बच्चे की कमां की सर्जरी कर बोन दान की प्रक्रिया पूरी की गई। तो वहीं दूसरे ऑपरेशन टेबल पर बच्चे की सर्जरी की गई।

15 घंटे तक चली इस सर्जरी के दौरान बच्चे के गर्दन के रीढ़ की हड्डी में बोन ग्राफ्ट किया गया। साथ ही रीढ़ ही हड्डी के अगले हिस्से में 2.5 मिलीमीटर की PLLA (Poly-L-Lactide) Plate और पिछले हिस्से में विशेष तरह के सूचर टेप का इस्तेमाल कर उसे फिक्स किया गया। सर्जरी के करीब 11 महिने बाद बच्चे को वेंटिलेटर से बाहर निकाल, जिसके बाद बच्चे को एक हफ्ते तक निगरानी में रखा गया और बुधवार को बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बच्चे का पहला जन्मदिन भी ट्रामा सेंटर में ही बनाया गया। बच्चे के गले में अभी ट्यूब डली हुई है। सब कुछ ठीक रहा तो इसे 5 या फिर 6 महिने बाद निकाला जाएगा।

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