क्यों मनाया जाता है विश्व अस्थमा दिवस और कब हुई थी शुरूआत?

दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण और बदलतें लाइफस्टाइल की वजह से अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में अस्थमा के मरीज़ करीब 3 करोड़ हैं। तो ऐसे में लोगों को अस्थमा के बारे में पूरी जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है। इसलिए लोगों में अस्थमा के बचाव और रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए, हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इस साल ‘विश्व अस्थमा दिवस’ 2 मई को मनाया जा रहा है। अस्थमा को दमा के नाम से भी जाना जाता है।  

विश्व अस्थमा दिवस पहली बार कब मनाया गया था? 

इस दिन को मनाने की शुरूआत 1993 में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी की WHO के सहयोग से ग्लोबल इनिशिएचिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा की गई थी। यह दिवस पहली बार 1998 में 35 से अधिक देशों में मनाया गया था।


विश्व अस्थमा दिवस 2023 की थीम क्या है?

विश्स अस्थमा दिवस को हर साल थीम के साथ मनाया जाता है और इस साल 2023 में इसकी थीम “अस्थमा केयर फॉर ऑल” रखी गई है। 


अस्थमा क्या है और क्यों होता है ?

अस्थमा फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा सांस की नली में सूजन होने के कारण होता है। 

अस्थमा के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे कि सीने में जकड़न, सांस फूलना, बात करने में कठिनाई होना, ज़्यादा थकान महसूस होना और खाँसी आना खासकर के रात के समय, हंसते हुए और व्यायाम के दौरान। लेकिन हां, ज़रूरी नहीं है कि हर किसी व्यक्ति में अस्थमा के यहीं लक्षण नज़र आएंगे। अस्थमा के कई प्रकार होते हैं और आपके लक्षण भी इसी बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति को अस्थमा का कौन-सा प्रकार है।

आज के समय में अस्थमा का सबसे बड़ा कारण हैं प्रदूषण इसकी के साथ ही कारखानों और वाहनों से निकने वाला धूआं अस्थमा का कारण बन रहा है। कुछ लोगों में यह जेनेटिक भी हो सकता है। इसी के साथ ही सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव भी इसका एक कारण बन सकते हैं। 

अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन अगर सही समय पर इसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो अस्थमा के मरीज़ को अस्थमा के कारण होने वाले दुष्प्रभावों और अस्थमा का दौरा आने से बचाया जा सकता है। अस्थमा रोग के उपचार के लिए एक विशेष इनहेलर या दैनिक दवाई दी जा सकती हैं।

अस्थमा के दुष्प्रभाव बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

अस्थमा के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है बचाव। मरीज़ को कई बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे कि:-

- अपने अस्थमा के कारण को समझें और उन चीजों से दूरी बनाएं जिसे दिक्कते बढ़ सकती है

- धूल मिट्टी और धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से दूर रहें।

- सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें। 

- अपने खान-पान का ध्यान रखें।

- अगर आप अस्थमा के मरीज़ हैं तो अपनी दावईयां साथ रखें, खासकर इन्हेलर या अन्य की भी दवाए जो आपको डॉक्टर ने बताई है।

- डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाएं लें।


इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक या शैक्षक उद्देश्य के लिए है। इस जानकारी को केवल सुझाव के रूप में लें। आर्टिकल में दी गई जानकारी और सलाह को बीना डॉक्टर की सलाह के ना अपनाएं।

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