जानिए वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाने की शुरूआत कब हुई और ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े कुछ मिथ और सचाई
मां का दूध बच्चे की कई बीमारी से रक्षा करता है। इसलिए माँ का दूध बच्चे के लिए अमृत समान होता है। ऐसे ही ब्रेस्टफीडिंग कराना मां के लिए भी बहुत ज़रूरी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल शिशुओं में से लगभग 60 प्रतिशत को 6 महीने तक जरूरी ब्रेस्टफीडिंग नहीं मिलती है। ब्रेस्टफीडिंग को प्रोत्साहित करने और दुनिया भर में शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए हर साल 1 से 7 अगस्त को वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के तौर पर मनाया जाता है।
वर्ल्ड ब्रेस्फीडिंग वीक मनाने की शुरूआत कब हुई?
1990-91 में वर्ल्ड एलायंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन (WABA) की स्थापना की गई थी। साल 1992 में पहला वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक अधिकारिक तौप पर आयोजित किया गया।
इस साल वर्ल्ड ब्रेसफीडिंग वीक की थीम क्या है?
इसे मनाने के लिए हर साल एक थीम निर्धाति की जाती है इस साल की वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक की थीम ‘स्तनपान के लिए कदम बढ़ाएं, ब्रेस्टफीडिंग के बारे में शिक्षित करें और समर्थन करें’ रखी गई है।
ब्रेस्टफीडिंग बच्चे के लिए कैसे फायदेमंद है?
• जन्म देने के बाद माँ के शुरूआती दूध को ‘कोलोस्ट्रम’ कहा जाता है। इस दूध में रोग-प्रतिकारक और पोष्क तत्वों की भरमार होती है। इसलिए इसे ‘लिक्विड गोल्ड’ भी कहा जाता है और यह दूध शिशु को ज़रूर पिलाना चाहिए।
• मां के दूध में पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है, जो शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए ज़रूरी है।
• स्तनदूध शिशु की इनफेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
• इसमें एंटीबॉडीज होते हैं, जो शिशु को सर्दी-जुकाम, छाती में इनफेक्शन और कान के संक्रमण आदि से रक्षा करता है।
• स्तनपान करवाने से बचपन में शिशु की सांस फूलने और गंभीर एग्जिमा विकसित होने का खतरा कम हो सकता है।
• इसमें बड़ी तादाद में रोग-प्रतिकारक तत्व होते हैं जो बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग कराना मां के लिए कैसे फायदेमंद साबित हो सकती है?
• कई रिसर्च के मुताबिक स्तनपान करवाने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
• ऑस्टियोपोरोसिस रोग के विकसित होने की आशंका कम हो जाती है।
• गर्भावस्था में बढ़े वज़न को कम करता है।
WHO के अनुसार 6 महीने तक शिशु को मां का दूध पिलाना चाहिए और इसके बाद दो साल की उम्र तक उसे धीरे-धीरे ठोस आहार देने शुरू कर देने चाहिए। बच्चे को दूध पिलाने के बाद याद से डकार ज़रूर दिलानी चाहिए।
ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े कुछ मिथ है जो लोग सच मान लेते हैं:-
मिथ: क्या दूध पीने से माँ का दूध बढ़ेगा?
सच: गलत। माँ के दूध पीने से दूध नहीं बढ़ता है। माँ का दूध तब ही बढ़ता है जब बच्चा बार बार दूध पीकर उसे खाली करता है। इसलिए बच्चे को बार बार फीडिंग कराए। इसलिए
मिथ: स्तनपान करवाते समय दर्द होना सामान्य है।
सच: स्तनपान सही तरीके से करवाया जाए तो कभी दर्द नहीं होता। यदि आपको कोई दर्द या परेशानी महसूस हो रही है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
मिथ: बच्चे के जन्म के 3 या 4 दिन के दौरान ज्यादा दूध नहीं होता है।
सच: शुरूआती दिनों में जो दूध को ‘कोलोस्ट्रम कहते’ हैं। इसे ‘लिक्विट गोल्ड’ भी कहा जाता है। इस दूध में रोगों से लड़ने की भरपूर शक्ति और पोषक तत्वों की भरमार होती है। इन दिनों दूध कम ज़रूर बनता है लेकिन अगर बच्चा ठीक ढंग से फीड ले रहा है तो बच्चे के छोटे पेट को भरा रखने के लिए काफी है।
मिथ: बोतल से फीड करवाने के बाद, स्तन से फीड करवाना आसान होता है।
सच: ये बच्चे पर निर्भर करता है। ज्यादातर इसके विपरीत होता है अगर पहले ब्रेस्टफीड कराने के बाद बाहर का फीड कराएं तो ज्यादा आसान होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक या शैक्षक उद्देश्य के लिए है। इस जानकारी को केवल सुझाव के रूप में लें। आर्टिकल में दी गई जानकारी और सलाह को बीना डॉक्टर की सलाह के ना अपनाएं।

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