विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरूआत कब हुई और भारत में जनसंख्या बढ़ने के क्या कारण हैं?
नमस्कार, आज हम बना रहे हैं विश्व जनसंख्या दिवस यानी की World Population Day। दुनियाभर में बढ़ती आबादी से जुड़ी समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल आज ही के दिन 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। आज के समय में दुनिया के हर विकासशील और विकसित देश जनसंख्या में होने वाली वृद्धि के कारण चिंतित है, ऐसे में जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए लोगों को जागरूक करना बेहद ही ज़रूरी है।
ताज़ा Data के मुताबिक इस समय दुनिया की कुल जनसंख्या 7.96 Billion से भी अधिक है। हर दिन लाखों की संख्या में जनसंख्या बढ़ रही है। फिलहाल दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश चीन है, जबकि दूसरे स्थान पर भारत का नाम आता है। चीन की जनसंख्या जहां 1 अरब 40 करोड़ से अधिक है, तो वही भारत की जनसंख्या 1 अरब 38 करोड़ से अधिक है। भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश है जो प्रथम स्थान पर है और दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र राज्य है। जितनी बड़ी देश की जनसंख्या उतनी बड़ी समस्या। भारत में बढ़ती आबादी गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए बढ़ती जनसंख्या को कम करना बेहद जरूरी है।भारत के लिए बढ़ती आबादी कई समस्याओं का कारण बनती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के कारण आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार की समस्या पैदा हो रही है। जनसंख्या बढ़ने से श्रम-शक्ति में वृद्धि होती है लेकिन रोजगार के अवसर उस अनुपात में न बढ़ पाने से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है। जिसकी वजह से अधिकांश लोगों के जीवन स्तर की गुणवत्ता में कमी आ रही है|
हालांकि भारत सरकार ने इस पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए हैं लेकिन लोगों में इसकी जानकारी के अभाव में और लोगों की पुरानी मानसिकता के कारण ये नियंत्रण पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। इसी पहल में भारत सरकार द्वारा परिवार नियोजन का नारा दिया गया है- ‘हम दो हमारे दो’। लेकिन अब हिंदुस्तान में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए भारत सरकार को जन्संख्या नियंत्रण के लिए कड़े और सख्त कदम उठाने की बेहद आवश्यकता है, ताकि भारत प्रगतिशील देशों में शामिल हो सकें।
जनसंख्या दिवस मनाने की शुरूआत कब हुई?
11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र ने आम सभा में विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला कियाथा। दरअसल, साल 1987 तक दुनिया की जनसंख्या पांच अरब के पास पहुंच चुकी थी, जो चिंता का विषय बन गई थी। इसलिए दुनियाभर के लोगों को बढ़ती जनसंख्या के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 11 जुलाई को विश्व जन्संख्या दिवस मनाने के शुरूआत की गई।
भारत में जनसंख्या बढ़ने के क्या कारण हैं?
- जन्म दर का प्रतिशत मृत्यु दर से अधिक होना भी इसका कारण हैं
- भारत में शादी को एक पवित्र कर्तव्य माना जाता है जहां लगभग सभी महिलाओं की शादी प्रजनन क्षमता की आयु में आते ही हो जाती है। जल्दी शादी करने से गर्भधारण करने की अवधि भी बढ़ जाती है।
- गरीब परिवारों में एक धारणा है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। कुछ लोग यह मानते हैं कि बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए भी बच्चों का होना जरुरी है।
- भारत अब भी गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। कई लोग इस बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं या फिर इससे पूरी तरह अनजान हैं। निरक्षरता भी आबादी बढ़ने का एक अन्य कारण है।
- भारत में बेटे परिवार में पैसे कमाने वाले और परिवार को चलाने वाले माने जाते हैं। इस दकियानूसी सोच के चलते माता-पिता पर बेटा पैदा करने का दबाव बहुत बढ़ जाता है। और बेटे की चाह में माता-पिता बच्चें को जन्म देते रहते हैं।
जनसंख्या नियंत्रण करने के फायदतें कुछ इस प्रकार होंगे
- गरीबी, महंगाई और बेरोज़गी में गिरावट आएगी।
- जनसंख्या विस्फोट पर लगाम लगेगी।
- पृथ्वी की स्थिरता सुनिश्चित हो सकेगी।
- पर्यावरण का दोहन कम होगा।
- प्राकृतिक संसाधनो का बचाव हो सकेगा।
- संसाधनों की कमी से जुडी समस्याओं में कमी आएगी।
- देश के नागिरकों को स्वास्थ सम्बंधी सेवाएं बेहतर प्राप्त हो पाएंगी।
- बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त होगी।
- महिलाओं की पारम्परिक भूमिका में काफी बदलाव आएँगे।
- पर्यावरण को राहत मिलेगी, ग्लोबल वार्मिंग और वैश्विक प्रदुषण से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
- भारत सरकार, नेताओं और नीति निर्माताओं को एक मजबूत जनसंख्या नीति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए।
- शिक्षा किसी भी देश के सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। देश के हर बच्चे के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण से ताकि वो देश की परिस्थितियों को समझ सकें। शिक्षा के माध्यम से ना केवल जनसंख्या वृद्धि का निकारण और नियंत्रण किया जा सकता है। बल्कि देश के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
- परिवार नियोजन के उपायों को लोगों तक पहुंचाना और इसके लिए प्रचार-प्रसार किए जाने चाहिए जिससे लोगों में जागरूकता की भावना उत्पन्न होगी और यह जनसंख्मया वृद्धि के नियंत्रण के लिए आवश्यक है।
- भारत में जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी देखते हुए संतान को जन्म देने की सीमा निर्धारित कर देनी चहिए इससे जनसंख्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
इसलिए आज जरूरत है हमें ये समझने की, की बढ़ती जनसंख्या कैसे देश के लिए और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। ऐसे में सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए और लोगों को इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चलाने चाहिए ताकि लोग अपनी इस जिम्मेदारी को समझ करें। ये हम सभी का कर्तव्य है कि अपनी इस जिम्मेदारी को समझें और जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे को गंभीरता से लें।

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