अनुच्छेद370 पर केंद्रीय सरकार का ऐतिहासिक फैसला जानिए क्या होंगे बदलाव?

भाजपा का ऐतिहासिक फैसला जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया गया है। लोकसभा में यह बील 370 वोट से पारित हो गया है और विपक्ष में 70 वोट पड़े है।  जम्मू-कश्मीर में यह अनुच्छेद 1947 में शेख अब्दुल्ला ने किया था। शेख अब्दुला को राज्य का प्रधानमंत्री महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नियुक्त किया था। तब शेख अब्दुला ने अनुच्छेद 370 को लेकर यह दलील दी थी की संविधान में इसका प्रबंध अस्थायी रूप में ना किया जाए। उन्होनें राज्य के लिए न टूटने वाली लोहे की तरह स्वायत्ता की मांग की थी, लेकिम केंद्र ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। धारा 370 में घाटी को विशेष अधिकार दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। इस अनुच्छेद के मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है। बाहरी को लोग जम्मू-कश्मीर में संपत्ती नहीं खरीद सकतें। बाहरी लोग राज्य सरकार की नौकरी नहीं कर सकते। जम्मू-कश्मीर के मौजूद संविधान के अनुसार, स्थायी नागरिक वही व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा और कानूनी तरीके से संपत्ति का अधग्रहण किया हो। इसके अलावा वह शख्स जो 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो।

इससे पहले 4 तारीक की रात को जम्मू-कश्मीर में धारा 144 लगा दी गई थी। तभी से यह चर्चा में था कि सरकार जम्मू-कश्मीर से जुड़ा कुछ बड़ा फैसला लेने वाली है। रात से ही सुरक्षा घाटी में अतिरिक्त सुक्षाबलों को तैनात कर दिया है, पूरी घाटी में मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है, जम्मू-कश्मीर में स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए थे। देर रात को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोम को नज़रबंद कर दिया गया। दोनों ही नेताओं ने रात को ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी, दोनों ही नेता लगातार ट्वीट कर अपील कर रहे थे कि सरकार को साफ करना चाहिए कि कश्मीर में क्या हो रहा है। ऐसे में लोगो को इंतजार था कि आखिर सरकार ऐसा कौनसा बड़ा फैसला लेना चाह रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्य सभा में संकल्प पेश किया था। देश के राष्ट्रपति ने इसपर अपनी सहमति जताते हुए हस्ताक्षर कर चुके हैं। कुछ नेता इसे एक देश-एक संविधान बता रहे हैं। तो वहीं कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं। यह देश के लोगो के लिए बड़ी खुशखबरी है। तो वहीं कुछ विपक्षी ने जैसे कि बीएसपी और अरविंद केजरीवाल ने भी इस बील का समर्थन किया है। आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में होंगे यह बदलाव...
- जम्मू-कश्मीर अब विशेष राज्य नहीं।
- जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।
- अब अन्य राज्यों के लोग भी जम्मू-कश्मीर में संपत्ती खरीद सकते हैं।
- जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान नहीं रहेगा, वहां अब भारत का संविधान लागू होगा।
- जम्मू-कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा। मतलब अब वहां भी तिरंगा शान से लहरेगा।
- जम्मू-कश्मीर में दोहरी नागरिकता खत्म।
- भारत के राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान अपराध।
- जम्मू-कश्मीर से अब लद्दाख को अलग कर दिया गया है।
- जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होगा और लद्दाख अलग केंद्र शासित देश होगा।
- जम्मू-कश्मीर की लड़कियों को अब दूसरे राज्य के लोगों से भी शादी करने की स्वतंत्रता होगी। दूसरे राज्य के पुरूष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।
- अब अनुच्छेद-370 का खंड-1 केवल लागू रहेगा। शेष खंड समाप्त कर दिए गए हैं। खंड-1 भी राष्ट्रपति द्वारा लागू किया गया था। राष्ट्रपति द्वारा इसे भी हटाया जा सकता है। अनुच्छेद 370 के खंड-1 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर की सरकार से सलाह कर राष्ट्रपति, संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू कर सकते हैं।
- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। मतलब जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार बनेगी, लेकिन लद्दाख की कोई स्थानीय सरकार नहीं होगी।

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