इस वज़ह से सावन में होता है शिव लिंग का जल अभिषेक!


17 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने का 15 अगस्त को अंतिम दिन होगा। इस सावन में 4 सोमवार और 4 मंगलवार पड़ने की वज़ह से इसे शुभ माना जा रहा है। हिंदू कैलेंडर में सभी महीनों में से सावन यानी की श्रवण मास के इस महीने को पवित्र और सबसे शुभ माना जाता है। इस महीनें में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा के लिए भी यह महीना शुभ माना जाता है।

जहां पूरे महीने को शुभ माना जाता है वहीं सावन के इस महीने में सोमवार और मंगलवार को काफी पवित्र दिन माना जाता है। लोग सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं इन्हें श्रवण सोमवार व्रत के रूप में जाना जाता है। इस साल सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को होगा। मंगलवार माता पार्वती जी को संमर्पित होता है और मां का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग मंगलवार को भी उपवास रखते हैं।

सावन के इस महीने में शिव भगत भारत के कोने-कोने से नंगे पैर चलकर या फिर परिवहन के साधनों से भारत की पवित्र नदियों जैसे की गंगा नदी का दौरा करते हैं और उसी पवित्र नदी का पानी अपने कंधे पर रही काँवर पर लाते हैं और गंगा के इसी पानी से अपने निकटत मंदिरों में भगवान शिव के लिंग का अभिषेक करते हैं।

एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, सावन के इस महीने में समुद्र मंथन हुआ था। भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से निकला हलाहाल विष पिया और गले में अटकाये रखा। इससे उनके कंठ नीला पड़ गया और तब शिव का नाम पड़ा निलकंठ। हलाहाल विष से उत्पन्न हो रही अग्नि इतनी तेज थी कि शिव के शरीर पर इसका असर होने लगा तभी देवी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए उनपर जल चढ़ाया ताकी उन्हें ठंडक मिले। इससे शिव प्रसन्न हो गए। तभी से शिव पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। मानना जाता है कि ऐसा करने से शिव जी प्रसन्न होते है।

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