केरल में फिर एकबार निपाह वायरस की दस्तक से लोग सहमे...


उत्तर केरल में पिछले साल निपाह वायरस 17 लोगों की जान लेनें के बाद अब एक बार फिर दूबारा दस्तक दें चुका है और  23 वर्ष के एक कॉलेज छात्र में निपाह वायरस की पुष्टि की गई है। केरल की स्वास्थय मंत्री के.के शैलजा ने कहा कि पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान एऩआईवी में छात्र के रक्त के नमूने की जांच की गई जिसमें निपाह के संक्रमण की पुष्टि की गई है। इससे पहले 2 विषाणु विज्ञान संस्थानों-मणिपाल इंस्टिटयूट ऑफ वायरोलॉजी और केरल इंस्टिटूयट ऑफ वायरोलॉजी ऐंड इंफेक्शस डिजीजेज- में भी रक्त के नमूनों की जांच की गई थी, जिनमें निपाह के संकेत मिले थे। इसके साथ ही छात्र के साथ संपर्क में रहनें वाले अन्य जिलों के 311 लोगों को भी निगरानी में रखा गया है।
सरकार ने लोगों से बिना घबराए इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कुछ कदम उठाने के लिए कहा है। शैलजा ने कहा, ‘हमें विश्वास है कि हम इसका सामना कर सकते हैं। हमने पिछले साल कोझीकोड में इसका सामना किया था और इसे काबू किया था’। मुखमंत्री पिनारयी विजय मे कहा कि ‘घबराने की जरूरत नही हैं क्योंकि स्वास्थय नेटवर्क चुनौती से निपटने में सक्षम है’। बता दें कि, पिछले साल निपाह वायरस केझिकोड के परेम्बरा शहर में 19 मई को मिला था। इसकी वजह से एक सप्ताह में 10 लोगो जी जानें गई थी। इसे प्रभावित 18 लोगों में से 17 लोगों की जानें गई थी।  इसे पहले निपाह वायरस 2001 में पश्चिम बंगाल की सिलीगुड़ी में निपाह से पीडित 66 में से 45 लोगों की मौत हो गई थी और 2007 में नादिया पश्चिम बंगाल में पांच लोगो इसे पीड़ित हुए जिनमें से 5 की ही जान चली गई। भारत में अभी तक 75 लोग निपाह सें अपनी जान गवाह चुकें हैं।
निपाह वायर से प्रभावित लोगों के ईलाज को लिए अभी तक कोई दवाई या टिका ऊपलब्ध नहीं हैं। हालांकि दवा रिबाविरन को इन विट्रो में वायरस के खिलाप प्रभावी दिखाया गया है। इस संक्रमण का ईलाज सिर्फ लक्षणों और सपॉटिव केयर को ध्यान में रखकर किया जाता है। निपाह वायरस इकदम से सामनें आता है और सही इलाज और सावधानी ना होनें पर तेजी से फैलता है।
निप्पा वायरस के लक्षण
घातक वायरस से संक्रमित लोग निम्नलिखित लक्षण विकसित कर सकते हैं –
  •        बुखार
  •        सिर दर्द
  •        उल्टी
  •       मायालगिया (मांसपेशियों में दर्द)
  •       गले में खरास
  •       चक्कर आना,
  •       मानसिक भ्रम
  •      तंत्रिका संबंधी संकेत हो सकते हैं जो तीव्र एन्सेफलाइटिस का संकेत देते हैं। कुछ रोगियों में एटिपिकल निमोनिया और गंभीर श्वसन समस्याएं हो सकती हैं, और ये लक्षण 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में प्रगति कर सकते हैं।
 निप्पा वायरस का संचरण
निपाह वायरस के अधिकांश मानव संक्रमण बीमार सूअरों या उनके दूषित ऊतरों के सीधे संपर्क में रहने के कारण होती है। हालांकि, संक्रमित लोगों के परिवार और देखभाल करने वालों में निपाह वायरस के मानव से मानव संचरण की भी रिपोर्ट की गई है। वास्व में, डब्लयूएचओ के आंकड़ो से पता चलता है कि 2001 से 2008 तक, बांग्लादेश में लगभग आधे मामले संक्रमित रोगियों की देखबाल कर रहें और पीड़ित के सम्पर्क में रहने वाले लोगों में मानव से मानव संचरण के कारण थे
संक्रमित चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आने से निप्पा वायरस का संचरण भी होता है - उदाहरण के लिए, संक्रामक चमगादड़ से दूषित कच्ची खजूर के रस का सेवन करने से वायरस का संक्रमण हो सकता है। भारत और बांग्लादेश में, NiV के संपर्क में कच्ची खजूर के रस की खपत और चमगादड़ के साथ संपर्क को जोड़ा गया है।

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