बिहार में चमकी बुखार का प्रकोप लगातार जारी, अभी तक इतने बच्चों की मौत

बिहार में चमकी बुखार से मरने वालो की संख्या दिन प्रतीदिन बड़ती जा रही है। चमकी बुखार से अभी तक 135 बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। 15 मौतें मोतिहारी में और 6 मौतें बेगूसराय में हई हैं। इस बुधवार को मुजफ्फरपुर के अस्पताल में चमकी बुखार के 16 नए मामले सामने आए है। साथ ही मोतिहारी के सदर अस्पताल में बुधवार को 19 बच्चों को भर्ती किया गया  है। बेगुसराय में भी चमकी के 3 नए मामले सामने आए हैं। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि यह बुखार का सिलसिला कब खत्म होगा? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नही है।

दरअसल चमकी बुखार एक दिमागी बुखार, जापामी इंसेफवाइटिस, नवकी बीमारी है, एक गंभीर बिमारी है। जिसका समय रहते इलाज करना जरूरी है। यह बीमारी अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में फैलता है। यह बीमारी 1 साल से 15 साल की उम्र के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। लगातार हो रही मौतों के कारण जांच के लिए स्वास्थय विशषेतज्ञों की टीम मुजफ्परपुर में है। वहीं, स्वास्थय विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इलाके में चिलचिलाती गर्मी, नमी और बारिश के ना होने के चलते लोग हाइपोग्लाइसीमिया शरीर में अचानक शुगर की कमी के कारण लोगो की मौते हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुरास यह भी बताया गया है कि चमकी बुखार का कारण लीची भी है सकती है। कहा जा रहा है कि मुजफ्फरपुर के आस-पास उगाई जाने वाली लीची में कुठ जहरीले तत्व हैं।

चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज़ बुखार चढ़ा रहता है। बदन में ऐंठन होती है, बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं, कमजोरी के कारण से बच्चा बार-बार बेहोश होता है, यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलता। जबकि आम बुखार में ऐसा नही होता। इन लक्षणों को नज़रअंदाज नही करना चाहिए नही तो आगे चलकर ये गंभीर हो सकती है।

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