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शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह के जन्मदिन पर देश के शूरविर को शत् शत् नमन

"इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर में इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।" इन पंक्तियों को पढ़कर आप समझ ही गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं देश के क्रांतिकारी जवान शहीद  सरदार भगत सिंह कि उनता जन्म 28 सितंबर 1907 में पाकिस्तान के बांगा गांव में हुआ था। आज उनकी 112वीं जयंती है। भगत सिंह का नाम लेते ही हमारे सिना चोड़ा हो जाता है दिल में देश प्रेम का एक अलग ही जोश जुड़ जाता है। भगत सिंह के बारे में एक बात बताई जाती है, बच्चपन में भगत सिंह के हाथ बंदूक लग गई, यह बंदूक उनकी चाचा की थी। भगत सिंह वह बंदूक लेकर अपने चाचा के पास गए और उनसे पूछा कि इसे क्या करते हैं? चाचा ने ज़वाब दिया कि इससे अंग्रेजो से हुकूमत से लड़ेगे। कई दिन बाद भगत सिंह ने अपने चाचा को खेती करते हुए देखा वह आम का पेड़  लगा रहे थे। तभी भगत सिंह ने अपने चाचा से पूछा चाचा यह क्या कर रहे हो जवाब में चाचा ने बोला की आम का पेड़ लगा रहा हुं जब यह बड़ा हो जाएगा तो आम देगा जो सब परिवार वाले मिलकर खांएगे। तभी भगत सिंह ने एक गढ्ढा खोदा और उसमें बंदूक डालने वाले थे तभी चाचा ने पूछा कि यह क्या कर ...

पंजाब के लोकप्रिय कलाकार गुरदास मान के खिलाफ प्रदर्शन क्यों?

पंजाब में कुछ दिनों से किसी ना किसी गाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है पहले ऐली मंगत और रमी रंधावा के बीच विवाद फिर सिध्दू मुसेवाला अपने गाने को लेकर विवादों में बने रहे हालांकि वो माफी भी मांग चुके हैं और अब पंजाबी के लोकप्रिय गायक गुरदास मान  कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के एब्बटसफोर्ड में अपना शो करने पहुंचे लोक गायक गुरदास मान को “एक राष्ट्र एक भाषा" की हिमायत करने पर जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। तो आइए जानते हैं ऐसी कौन सी बात है जिसपर पंजाब के लोकप्रिय गायक गुरदार मान को लोगों के रोष का सामना करना पड़ रहा है। आखिर गुरदास मान की किस बात ने लोगों के दिलों को ठेस पहुंचाई है। एक इंटरव्यू में गुरदास मान ने कहा कि “पूरे देश में एक ही भाषा होनी चाहिए, जिसे सभी समझ सकें। जहां पंजाबी हमारी मातृ भाषा है, वहीं हिंदी भी हमारी मौसी है, इसलिए उसका भी उतना ही सम्मान होना चाहिए”। साथ ही उन्होनें कहा कि “लोग हिंदी फिल्में देखते हैं, गाने सुनते हैं। अगर हिंदी बोलनी. लिखनी भी सीख लेंगे तो इसमें क्या हर्ज है। एक देश की एक जुबान तो होनी ही चाहिए”। गुरदास मान का यह बयान सोशल मीडिया प...

दिल्ली में ट्रांसपोर्चर्स हड़ताल जो चालक नहीं कर रहें स्पोर्ट उनके साथ बदसलूकी क्यों?

दिल्ली में आज लोगों को अपने घर से दफ्तर जाने में कई मुशकिलों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल बात यह है कि दिल्ली-एनसीआर के ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन बृहस्पतिवार यानी की आज के दिन हड़ताल पर हैं जिसमें ऑटो रिक्शा, प्राईवेट बस और ट्रक सभी की आवाज़ाही बंद है। दिल्ली मे कई जगह लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इस हड़ताल के चलते जिन स्कूलों की अपनी बस नहीं हैं उन स्कूलों ने छुट्टी की घोषणा कर दी हैं। कई स्कूल जिनमें आज के दिन बच्चों के पेपर थें उन्हें पोस्पोन करना पड़ा है। इससे हम यह कह सकतें है की दिल्ली-एनसीआर में रहनें वाले लोगों को इस ट्रांसपोर्टर्स हड़ताल की वज़ह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वैसे तो ओला-ऊबर टैक्सियों की सर्विस नहीं मिल रही हैं लेकिन जहां मिल रही है वहां ओला-ऊबर वालों ने हड़ताल को देखते हुएं अपने रेट आम दिन से दोगुने कर दिए हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने यह हड़ताल एक सितंबर को लागु हुए मोटर व्हीक्ल एक्ट- 2019 के खिलाफ जारी की है, जिसकी वज़ह से बसों और मेट्रों में तो अच्छी खासी भीड़ देखने के मिल रही हैं। लेकिन इसे आगे ज...