छोटे साहिबजादों सबसे मासूम कुर्बानी - 27 दिसंबर 1705
सिखों के दसवें गुरू गोविंद सिंह जी के परिवार की शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। जब गुरू गोविंद सिहं साहिब जी ने 20 दिसंबर को आनंदपुर साहिब छोड़ दिया तब सरसा नदीं पार करते समय नदी में पानी के बहाव के कारण गुरु जी का परिवार बिछड़ गया। सरसा नदी के कहर में गुरू जी का परिवार ऐसा बिछड़ा की फिर वापिस मिल ना पाया। बिछड़ने के बाद गुरु गोबिंद सिंह, 40 सिंह और दो बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह चमकौर पहुंच गए। उसी रात मुगलों की फौज ने चमकौर के किले पर हमला बोल दिया। चमकौर के किले में हुई उस जंग में 22 दिसंबर को गरू गोविंद सिंह जी के दो बड़े बेटे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी और 40 सिंह शहीद हो गए। दूसरी तरफ गुरू जी का रसोइए गंगु गुरू जी की माता गुजरी जी और दोनो छोटे साहिबजादें बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को अपने घर ले गया। लेकिन रसोइए गंगु ने पैसों की लालच में परिवार से बिछड़ गयी गुरु गोबिंद जी की बुजुर्ग माता और दो मासूम छोटे बेटों को वज़ीर खान के हवाले कर दिया । अमृतसर से 200 किलोमीटर दूर सिरहिन्द में दिसंबर की ठंड में गुरु गोबिं...